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इस देश के नन्हे मासूमों का दर्द देखकर आह निकल जाती है, यदि ऐसे दर्द में मरहम लगाने वाले मिल जाये तो जिन्दगी सवर जाती है।


मैं रूपम जौहरी एक स्पेशल बच्चे की माँ हूँ मेरे बच्चे का नाम अंचल जौहरी है जो 22 साल का है । मेरा बेटा 7 साल का था जब मुझे ऑटिज्म के बारे में पता चला उससे पहले डॉक्टर मेरे बच्चे को मेंटली रिटारडेड और मंदबुद्धि बोलते थे जैसे ही मुझे पता चला ऑटिज्म क्या है ? मैंने उसके बारे में पढ़ना और और अपने बेटे के लिए बहुत सारे कोर्सिस किये जैसे स्पीच थेरेपी चेन्नई से सीखी बेंगलुरु से ऑक्यूपेशनल थेरेपी का कोर्स किया दिल्ली से मदर एंड चाइल्ड प्रोग्राम किए उसका ही रिजल्ट रहा कि मेरा बच्चा बोलने लग गया और अब अपना काम सब खुद से कर लेता है पहले वह बहुत हाइपर था एक जगह पर बैठता नहीं था हैंड फलैपिंग करता था और रात को सोता नहीं था कभी कभी बच्चों को मारता भी था काट भी लेता था लेकिन अब बहुत शांत बहुत अच्छा बच्चा है अपने रोज के काम वह अच्छे से करता है जैसे नहाना खाना अपनी कोई भी जरूरत होती है वह हमें बता पाता है फिर मैंने हर बुधवार को बीएचईएल में अपने घर पर फ्री ऑफ कॉस्ट स्पेशल बच्चों की मदर को सिखाना शुरू किया मेरा बेटा तबला बजाता है बहुत अच्छा मैं उसके लिए वोकल म्यूजिक सीख रही हूं वह बहुत सारे गाने गाता है और सबसे बड़ी बात वह हमेशा खुश रहता है और वह स्विमिंग भी करता है मेरे पास अधिकतर माँ आती हैं जिन की फैमिली बल्कि हस्बैंड भी कॉर्पोरेट नहीं करते हैं वह मेरे पास आकर बोलती हैं कि मैडम हम कहां जाएं कुछ माँ भी एक्सेप्ट नहीं करती है कि उनका बेटा स्पेशल है आजकल के दौर में हर मां बाप अपने बच्चे को ऑल राउंडर बनाना चाहते हैं मां बाप को अपने बच्चों से इतनी सारी उम्मीदें हैं कि वह स्पेशल बच्चे को एक्सेप्ट ही नहीं कर पाते हैं बच्चे को मारते हैं हर बच्चा अलग है भगवान ने सब को अलग बनाया है किसी को कुछ खूबी दी है किसी को कुछ आपको देखना है की आपके बच्चे में क्या विशेषता है मैं स्पेशल बच्चों की माँ को ट्रेनिंग देने के लिए समय-समय पर हरिद्वार में दिल्ली से इलाहाबाद से डॉक्टर्स बुलाकर ट्रेनिंग देती हूं कुछ माता-पिता उस कैंप में भी नहीं आते हैं क्योंकि वह अपने बच्चे को बाहर निकाल कर सोसाइटी में बताना नहीं चाहते हैं कि उनका बच्चा स्पेशल है मेरी यह रिक्वेस्ट है प्लीज अपने बच्चे को एक्सेप्ट करें उसे प्यार करें सोसाइटी से भी यह रिक्वेस्ट है कि वह स्पेशल बच्चों के पेरेंट्स को उसे पालने में सपोर्ट करें अपने बच्चों को उस बच्चे के साथ खेलने भेजें ताकि स्पेशल बच्चे में कॉन्फिडेंस डेवलप हो यह बच्चे हमारी ही सोसाइटी का हिस्सा है आपको एक वाक्य बताती हूं मैं थोड़ी दिन पहले अपने बेटे के बाल कटवाने और शेव करवाने नाई की शॉप पर गई वहां पर एक अंकल आए हुए थे उन्होंने देखा बोले बेटा तू तो बहुत परेशान है मैंने कहा नहीं तो मैं परेशान नहीं हूं मेरा बच्चा जो 22 साल का है मेरी पसंद के कपड़े पहनता है मेरी पसंद के बाल कटवा आता है मेरी पसंद की शेव रखता है और मुझे बहुत प्यार करता है बल्कि इस उम्र के नार्मल बच्चे अपने मां बाप का इतना कहना कभी नहीं मानेंगे । रुपम जौहरी


Posted on 2019-08-14

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