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उत्तराखंड के सभी जिलों की पर्यावरणीय योजना बनाई जा रही है|


जिलाधिकारी ने कार्यशाला में उपस्थित नगर निकायों के अधिकारियों को शहर व कस्बों के ई-कचरें को एक स्थान पर संकलित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये हैं। साथ ही वायु में प्रदूषण के स्तर को मापने के लिए आवश्यक यांत्रिक उपकरणों की स्थापना को लेकर प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिये हैं।

रिपोर्ट  - अंजना भट्ट घिल्डियाल

रुद्रप्रयाग 23 सितम्बर, 2022ः राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर उत्तराखंड के सभी जिलों की पर्यावरणीय योजना बनाई जा रही है। जिसमे जनपद में 23 सितंबर को रुद्रप्रयाग ज़िले में जिला सभागार कार्यालय में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में एक दिन की कार्यशाला संपन्न हुई। जिलाधिकारी ने कार्यशाला में उपस्थित नगर निकायों के अधिकारियों को शहर व कस्बों के ई-कचरें को एक स्थान पर संकलित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये हैं। साथ ही वायु में प्रदूषण के स्तर को मापने के लिए आवश्यक यांत्रिक उपकरणों की स्थापना को लेकर प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिये हैं। जिलाधिकारी ने कार्यशाला में उपस्थित सभी अधिकारियों को पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड उत्तराखण्ड की वेबसाईट का अवलोकन कर अपने-अपने विभाग से सम्बन्धित सूचनाओं को अद्यतन करने के निर्देश दिये हैं। कार्यशाला में गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जे. सी. कुनियाल ने बताया कि एनजीटी के निर्देशानुसार राज्य के सभी 13 जिलों की पर्यावरण योजना को ड्राफ्ट के रूप में संपूर्ण कर लिया गया है। ड्राफ्ट रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए उत्तराखंड के अगले चरण मे जिले में संबंधित कार्यशाला भी संपूर्ण की गयी, जिसमें पर्यावरण योजना को लेकर जिले में उत्पन्न ठोस, प्लास्टिक, बायो मेडिकल, ई-वेस्ट एवं अन्य वेस्ट का प्रबंधन भविष्य में वैज्ञानिक तरीके से कैसे किया जाए, इन विषयों पर चर्चा हुई और जिले की पर्यावरणीय योजना को लेकर ठोस कदम बनाने की आवश्यकता है। वैज्ञानिक डॉ. जे. सी. कुनियाल जी ने बताया कि गीले कचरे का माइक्रोबियल कंपोस्टिंग के माध्यम से हम कैसे खाद बना सकते हैं उसके बारे में भी उन्होंने विस्तृत रूप से जानकारी दी। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सुनील नौटियाल जी ने भी वर्चुअली यह संदेश दिया कि बढती कूड़े की समस्या के निस्तारण में भी ध्यान देना होगा एवं जिले में बढ़ती पर्यटकों की संख्या को मध्येनजर रखते हुए सभी नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है।

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