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पतंजलि योगपीठ में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन


सर्वप्रथम पतंजलि ने आयुर्वेद में तथ्य आधारित वैज्ञानिक अनुसंधान कर आयुर्वेद को नये आयाम पर स्थापित किया : डॉ. अनुराग वार्ष्णेय

रिपोर्ट  - allnewsbharat.com

हरिद्वार, 13 मार्च। पतंजलि योगपीठ स्थित श्रद्धालयम परिसर में ‘पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली का आधुनिक विज्ञान के साथ समाकलन प्रासंगिकता, चुनौतियाँ, एवं भावी परिपेक्ष्य’ शीर्षक पर तीन दिन से चल रहे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ। आज के सत्र के मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल जी ने पारंपरिक रूप से प्रयोग किए जा रहे गूढ़ ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के मापदण्डों पर परखते हुए प्रयोग करने हेतु जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता में हम अपनी निजता को न भूलें। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हमारी प्राचीन चिकित्सा ने अपनी उपयोगिता प्रमाणित की है। सत्र के गेस्ट ऑफ ऑनर पतंजलि विश्वविद्यालय के डॉ. विनय कुमार कटियार जी ने जड़ी-बूटियों के भेषज गतिज विज्ञान को गणित के माध्यम से जानने के लिए नए वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी। इस अवसर पर पतंजलि अनुंसधान संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने कहा कि बड़ी विडम्बना है कि विश्व की सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा पद्धति ‘आयुर्वेद’ को पूर्ण रूप से औषधि का दर्जा नहीं मिल सका। ड्रग माफियाओं के षड्यंत्र तथा आयुर्वेद पर बड़े अनुसंधान कार्य न होना इसका महत्वपूर्ण कारण रहा। विश्व में सर्वप्रथम पतंजलि ने आयुर्वेद में तथ्य आधारित वैज्ञानिक अनुसंधान कर आयुर्वेद को नये आयाम पर स्थापित किया है। आने वाली पीढि़याँ पतंजलि के इस महान् कार्य से लाभान्वित होंगी। कार्यक्रम में पतंजलि हर्बल रिसर्च डिपार्टमेंट की साइंटिस्ट ई तथा टीम लीडर डॉ. वेदप्रिया आर्या ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली योग व प्राणायाम रही है। हमारे प्राच्य ऋषियों के अकूत ज्ञान व विज्ञान आधारित हमारी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली पूरे विश्व में विख्यात है। बदलते परिवेश के कारण पिछड़ी इस चिकित्सा प्रणाली को पूज्य स्वामी जी महाराज तथा श्रद्धेय आचार्य जी महाराज के पुरुषार्थ से संजीवनी मिली है। आज पूरे विश्व में पतंजलि योग व आयुर्वेद का पर्याय बन चुका है।

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