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हाई स्कोर और हाई परसेंटेज के फेर में उलझकर बच्चे या पेरेंट्स बच्चों को नाकाबिल समझते रहेगे :रेखा नेगी


मानव अधिकार संरक्षण समिति की नगर अध्यक्षा रेखा नेगी ने बताया बच्चों के रिजल्ट्स आ चुके हैं चारों तरफ अंकों की मारा मारी मची हुई है। कहीं टॉपर्स की बात हो रही है, तो कहीं अच्छा स्कोर करने वालों की बात हो रही है|

मानव अधिकार संरक्षण समिति की नगर अध्यक्षा रेखा नेगी ने बताया बच्चों के रिजल्ट्स आ चुके हैं चारों तरफ अंकों की मारा मारी मची हुई है। कहीं टॉपर्स की बात हो रही है, तो कहीं अच्छा स्कोर करने वालों की बात हो रही है, कुछ लोगों को बस यह मलाल है कि वे 100 से कुछ अंक दूर रह गए तो कुछ इस बात से दुखी हैं कि उनके मार्क्स 95 परसेंटेज को क्रॉस नहीं कर पाए। कहीं असफल होने वाले लोगों को ताने मारे जा रहे हैं। जो किसी न किसी कारण से फेल हो गए हैं। हाई स्कोर और हाई पर्सेंट के फेर में उलझकर बच्चे या परसेंटेज बच्चों को नाकाबिल समझते रहेगे तो बच्चों के लिए आगे बढ़ना बहुत मुश्किल हो जाएगा। अगर आपका प्रदर्शन बोर्ड एग्जाम्स या किसी अन्य एग्जाम में अच्छा नहीं रहा है तो भी इसे आखिर अवसर न माने क्योकि एक असफलता सौ सफलताओं के द्वार खोलती है इसलिए जीवन मे पल पल पर परीक्षाए आयेगी जिनमे कुछ सफलता तथा कुछ असफलता हाथ लगेगी। अपनी हिम्मत बनाकर रखिए और आगे बढते रहने का प्रयास करते रहे। रेखा नेगी ने बताया कि हर परीक्षा में सभी स्टूडेंट्स पास होने के इरादे से ही बैठते हैं। किसी के अंक बहुत अच्छे आ जाते हैं तो किसी को कम या मन-माफिक अंक नहीं मिलते। इन सब में यह जरूरी है कि आप अंकों के इस फेर में खुद को इतना न उलझा लें कि उसके पार दिखाई देना बंद हो जाये। यदि किसी कारणवश आपके अंक कम आए हैं या आप पास नहीं हो पाए है तब भी यह जान लें कि यह कोई अंतिम अवसर नहीं था। वास्तव में जीवन में कहीं भी कुछ खत्म नहीं होता है। असफलता का केवल इतना मतलब है कि सफलता के लिए प्रयास पूरे मन से नही किया गया। इसलिए फिर से एक नई शुरुआत करें। अपनी गलतियों का विश्लेषण करके उनसे सीखे और पूरे मनोयोग से सफलता के लिए प्रयास करे। सफलता जरूर मिलेगी। अंक कम आने पर या फेल हो जाने पर खुद को अकेला न करें। आप अकेले नहीं हैं, जो फेल हुए हैं। दुनिया में बड़ी-बड़ी हस्तियां फेल हुई हैं, परन्तु आज प्रयास से एक अच्छें मुकाम पर स्थापित है। परिवार और दोस्तों के बीच इस यकिन से बैठिए कि अगली बार आप बेहतर करेंगे और यह यकीन खोखला न हो, मजबूत हो। उन्होने बताया कि भले ही आपको खुद से तथा पेरेंट्स को आपसे बहुत उम्मीदें रही हों और रिजल्ट मनमाफिक न आया हो, तब भी खुद को दोषी न माने। इससे कुछ नहीं होगा। सबसे पहले स्वीकार करें कि आपका रिजल्ट मनचाहा नहीं आया है। इससे आपको स्वयं का विश्लेषण करने में आसानी होगी। निश्चित तौर पर आपको उनके प्रदर्शन से निराशा हुई होगी लेकिन आपने खुद जीवन में अपने आपको और दूसरों को विफल होते और फिर सफलता की सीढियां चढ़ते देखा होगा। यदि आप या वे लोग विफलता से हार मान जाते तो क्या वे जीवन का आनंद ले पाते? आपको भी यही बात अपने बच्चों को समझानी है और आगे अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरणा देनी है। उनका मनोबल भी गिरने नहीं देना है। इसलिए बिना किसी डर के आगे के भविष्य पर ध्यान दीजिए।

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