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कोरोना को हराने वाले कुछ योद्धा ऐसे भी नौजवान है जो पशु, पक्षियों और निर्धनों का सेवा कर रहे है।


74वें स्वतन्त्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर अनन्त सेवा मिशन की विधिवत् स्थापना सैकड़ों उत्साही समाजसेवी पशुपक्षीमित्र नवयुवक और नवयुवतियों ने संगठित होकर मोतीघाट, गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय पर एकत्रित होकर विश्वविद्यालय के कुलसचिव तथा विश्व प्रसिद्ध पक्षी वैज्ञानिक प्रोफेसर दिनेश चन्द्र भट्ट के आशीर्वाद के साथ सम्पन्न की।

74वें स्वतन्त्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर अनन्त सेवा मिशन की विधिवत् स्थापना सैकड़ों उत्साही समाजसेवी पशुपक्षीमित्र नवयुवक और नवयुवतियों ने संगठित होकर मोतीघाट, गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय पर एकत्रित होकर विश्वविद्यालय के कुलसचिव तथा विश्व प्रसिद्ध पक्षी वैज्ञानिक प्रोफेसर दिनेश चन्द्र भट्ट के आशीर्वाद के साथ सम्पन्न की। इस अवसर पर अपना हार्दिक उद्बोधन देते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव साहब ने कहा कि आप लोगों के द्वारा किया गया यह सेवा का कार्य प्रकृति की रक्षा करने का सर्वोत्तम कार्य है। पर्यावरणचक्र टूटने से प्रकृति का विनाश होता है, मनुष्य के आसपास रहने वाले पशुपक्षी हमारे पर्यावरणतन्त्र का हिस्सा हैं, इनके नष्ट हो जाने पर प्रकृति का सारा क्रम टूट जाता है, जिससे विभिन्न प्रकार की महामारियों के साथ-साथ विशाल आपत्तियाँ तो आती ही हैं, कुछेक अदृश्य कोरोना जैसी बिमारियाँ भी समाज में असहजता को उत्पन्न कर देती हैं। आज गौरैया जैसी पक्षी हमारे मध्य दिखाई नहीं देती है, जोकि प्रत्येक घर की शान हुआ करता थी। हमारे देखते ही देखते गिद्ध नामक पक्षी जोकि स्वच्छकार का कार्य करता था, वह लुप्त हो चुका है। ऐसे ही अनेक जीव-जन्तु भी उत्पीडित होकर हमारे व्यवहार के कारण बहुत दूर जा चुके हैं। अनन्त सेवा मिशन के माध्यम से इन नौजवानों के द्वारा जब इन पशु, पक्षियों और निर्धनों का सेवाकार्य होगा, तो यह प्रकृति की ही सेवा होगी, जिससे आपदाएं दूर करने में सहयोग मिलेगा। यह सेवा कार्य एक यज्ञ ही है। इसे प्रत्येक मनुष्य को करना अनिवार्य है। मिशन के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु आज पाँच सौ किलो हरा चारा, दो सौ किलो आटे की रोटियाँ, पचास किलो सोयाबीन की बडियाँ, 100 पैकेट ब्रेड, 50 किलो दूध के माध्यम से खाद्य सामग्री के साथ अनन्त सेवा मिशन की यह यात्रा प्रारम्भ हुई। गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय के सहायक मुख्याधिष्ठाता डॉ0 नवनीत परमार ने सेवाकार्य के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और डॉ0 प्रणव ने सब आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। शिल्पा गाँधी ने सेवाभाव के महत्त्व को एक व्रत के रूप में धारण करने का लाभ बताया। स्थापना दिवस के कार्यक्रम में कंवलजीतकौर, गैरी टण्डन, रुचिका अरोडा, बलराज ढींगरा, सक्षम खुराना, साशा गाँधी, अग्रज मिश्रा, गोविन्द कश्यप, प्रिया सचदेवा, समर्थ गाँधी, आयुष खुराना, निलेश पोपली, सागर कश्यप, नवलेश मिश्रा, नमन सैनी, डॉ0 पवनसिंह, प्रवीण कुमार, अतुल सैनी, निशान्त गर्ग, डॉ0 मनोज कुमार, मनोज शर्मा, रमेशचन्द्र शर्मा, डॉ0 अनीता शर्मा, टेसूराज गौड, डॉ0 सत्यदेव निगमालंकार आदि सेवाभावी जन उपस्थित रहे।

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