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वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि का असर गर्भवती महिलाओं पर भी पड़ रहा है।


ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ने से, समय से पहले प्रसव के मामले बढ़ेंगे

वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि का असर गर्भवती महिलाओं पर भी पड़ रहा है।गर्भावस्था के दौरान उच्च तापमान के संपर्क में आने पर उनकी कोख से मृत्यु या प्रीमैच्योर शिशु के पैदा होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।एक हालिया शोध में यह बात सामने आई है।शोधकर्ताओं ने पाया कि तापमान में हर एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी पर समयपूर्व या मृत प्रसव होने का खतरा 5 फ़ीसदी तक बढ़ जाता है।दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ विटवाटर्सरैंड के शोधकर्ताओं की टीम ने कहा,यह प्रभाव छोटे लगते हैं लेकिन इन निष्कर्षों का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खासा प्रभाव दिख सकता है क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग के कारण दुनिया भर में ज्यादा तापमान आम बात होती जा रही है।समयपूर्व जन्मे बच्चों को श्वास संबंधी परेशानीयां होती हैं।इसके अलावा उन्हें खिलाने में काफी समस्या आती है।इन बच्चों में संक्रमण होने का जोखिम ज्यादा होता है।ऐसे बच्चों में शारीरिक,विकास संबंधित अक्षमता,सेरिब्रल पेलेसी और दृष्टि दोष पनप सकते हैं।समय पूर्व प्रसव पर किए गए 40 शोधों में यह दर्शाया गया है कि यह कम तापमान की तुलना में उच्च तापमान पर ज्यादा सामान्य था।

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