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असमाजिक व अराजक तत्वों की गिरफ्त में कुंभ नगरी" - नशेड़ियों का अड्डा बनते गँगा के पवित्र घाट-


नील धारा के पश्चिम किनारे पर स्थित नीलधारा में 5 जघन्य हत्याएं हो चुकी हैं जिसमें मुकदमा अपराध सँख्या-321 धारा-302/307 नगर कोतवाली में पंजिकृत हो चुका है।

हरिद्वार(अजय शर्मा) तीर्थ नगरी में महाकुंभ का आयोजन शुरू हो चुका है मेला के दौरान लाखों की संख्यां में तीर्थ श्रदालुओं का आवागमन होगा इसके बाबजूद मेला प्रशासन ने अभी तक कुम्भ मेला भूमि को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया है सप्तऋषि घाट से कनखल तक के क्षेत्र में भारी मात्रा में कच्चे पक्के अतिक्रमणों की भरमार है गँगा किनारे आज भी सैंकड़ों की तादात में झुग्गी झोपड़ियाँ बसाकर असमाजिक व अराजक तत्वों ने अपना कब्जा जमा रखा है इनमें कई ऐसे शातिर रह रहे हैं जो नशीले पदार्थो की तस्करी में लिप्त हैं जो लगातार "बेख़ौफ़ जघन्य हत्याओं "को अंजाम दे रहे हैं| आपको बता दें कि आज संत बाहुल्य क्षेत्र में सप्तऋषि मार्ग पर त्रिदंडी आश्रम के पास एक फक्कड़ बाबा की लाश पाई गई जिसके सिर व माथे पर गंभीर चोटों के निशान थे शव की शिनाख्त नहीं हो पाई है पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमाटर्म हेतु जिला अस्पताल भेज दिया है इसी क्षेत्र में 14 जनवरी 2020 को करीब 6 नशेड़ी युवकों ने मिलकर एक फक्कड़ बाबा को नशीले पदार्थ न देने पर उसे लूटने के बाद फक्कड़ बाबा की जघन्य हत्या कर दी थी 24 अप्रेल 2017 में भी इसी क्षेत्र में एक फक्कड़ बाबा ने युवक की हत्या कर उसे मौत के घाट पहुंचा दिया इससे पूर्व भी नगर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के पूर्व दिशा में नील धारा के पश्चिम किनारे पर स्थित नीलधारा में 5 जघन्य हत्याएं हो चुकी हैं जिसमें मुकदमा अपराध सँख्या-321 धारा-302/307 नगर कोतवाली में पंजिकृत हो चुका है। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि इस संबंध में मेला अधिकारी कुम्भ मेला-2010 ने अपने पत्रांक सँख्या-3517/कुंभमेला अतिक्रमण दिनाँक-28/12/2009 को हरिद्वार के जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि गँगा किनारे पर सिथित भूमि में काफी संख्या में झुग्गी झोपड़ियाँ पड़ी हुई हैं चूंकि कुंभमेला के दौरान लाखों की संख्यां में तीर्थ यात्रियों का आवगमन होगा ऐसी सिथति में इन अबैध बस्तियों में रह रहे अराजक तत्वों द्वारा कोई भी जघन्य घटना घटित की जा सकती है इन स्थानों पर अतिक्रमण कर अवैधानिक रूप से बसाई गई झोपड़ियों को तत्काल हटाने का कष्ट करें लेकिन बिडम्बना है कि आज भी उपरोक्त क्षेत्रों में भारी तादात में अतिक्रमणों की भरमार है और अतिक्रमणकारी बेख़ौफ़ होकर अपने कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।

अजय शर्मा

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