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परमार्थ निकेतन पधारी मारीशस की राजदूत लक्ष्मी बाई स्वामी चिदानन्द सरस्वती से आशीर्वाद लेकर विश्व शान्ति हवन में किया सहभाग


परमार्थ निकेतन पधारी मॉरिशस की भारत में राजदूत शांति बाई हनुमान जी और उनके साथ कांगो के भारत में उप राजदूत गामवला, कांगो के काउनसूलेट नियँगा निबोला और कई अन्य डिप्लमैट्स भी पधारे। स्वामी चिदानन्द सरस्वती के पावन सान्निध्य में होने वाले विश्व शान्ति हवन में सभी विशिष्ट अतिथियों ने सहभाग कर विश्व शान्ति हेतु प्रार्थना की।

22 जून, ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन पधारी मॉरिशस की भारत में राजदूत शांति बाई हनुमान जी और उनके साथ कांगो के भारत में उप राजदूत गामवला, कांगो के काउनसूलेट नियँगा निबोला और कई अन्य डिप्लमैट्स भी पधारे। स्वामी चिदानन्द सरस्वती के पावन सान्निध्य में होने वाले विश्व शान्ति हवन में सभी विशिष्ट अतिथियों ने सहभाग कर विश्व शान्ति हेतु प्रार्थना की। मॉरिशस की भारत में राजदूत शांति बाई हनुमान जी ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से आशीर्वाद लेकर उन्हें माॅरिशस आने के लिये आमंत्रित किया। उन्होंने निवेदन किया कि वहां पर भी गंगा आरती का दिव्य क्रम आरम्भ हो ताकि आरती के माध्यम से दिव्य संदेश प्रसारित किया जा सके। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति, ब्लू इकॉनमी तथा सामुद्रिक शोध को बढ़ावा देने के लिये मॉरिशस और भारत अहम साझेदार और गहरे मित्र हो सकता है। परमार्थ निकेतन में विश्व संगीत दिवस के अवसर पर माँ गंगा के तट पर संगीत संध्या का आयोजन किया गया जिसमें साध्वी आभा सरस्वती जी, बांसुरीवादक पीयूष कश्यप, वोकल श्री संतोष कुमार, श्री शिव जी गायकवाड़, ब्राजील से आये डियागो, एना, श्री रामप्रसाद जी, श्री दिलीप क्षेत्री जी और परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों के संगीत का सभी ने आनन्द लिया। माँ गंगा के पावन तट से आज वंदे मातरम् और राष्ट्रभक्ति का संगीत प्रवाहित हुआ। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि संगीत है शक्ति ईश्वर की। हर मन में बसे है राम, रागी जो सुनाये रागिनी, रोगी को मिले विश्राम, भक्ति ही सबसे बड़ी शक्ति है। स्वामी जी ने कहा कि विश्व को आज जिस संगीत की जरूरत है वह है प्रेम का संगीत और मोहब्बत का संगीत। हमें नफरत की धाराओं को बंद कर संगीत के माध्यम से प्रेम की धारा को प्रवाहित करना होगा।

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