
शीत, वर्षा और कंपकंपाती हवाओं को मात देती आस्था
बसंत पंचमी पर हर की पौड़ी में उमड़ा श्रद्धा का सागर, माँ गंगा में हजारों ने लगाई आस्था की डुबकी
हरिद्वार | स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ – बसंत पंचमी
बसंत पंचमी के पावन पर्व पर मौसम की बेरुख़ी भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। हल्की–हल्की बारिश, कड़ाके की ठंड और शीतल हवाओं के बीच भी हर की पौड़ी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। कंपकंपाती ठंड के बावजूद श्रद्धालु माँ गंगा की पवित्र धारा में डुबकी लगाते रहे—यह दृश्य आस्था की अद्भुत मिसाल बन गया।
एक डुबकी भी भारी, फिर भी नहीं डगमगाई श्रद्धा
शीतल जल, सिहरन और ठंड—सब पर भारी रहा भक्ति भाव
मौसम का मिज़ाज इतना ठंडा था कि गंगा जल अत्यंत शीतल हो चुका था। एक डुबकी लगाना भी कई श्रद्धालुओं के लिए कठिन साबित हो रहा था, लेकिन भक्ति ने भय को पीछे छोड़ दिया। शाम तक हजारों श्रद्धालुओं ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर माँ गंगा में श्रद्धा पूर्वक स्नान किया।
पहाड़ों की बर्फबारी, मैदानी क्षेत्रों में शीतल हवाएँ
ठंड से जूझती तीर्थ नगरी, अलाव बने सहारा
उत्तराखंड के पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर हरिद्वार तक दिखाई दिया। शीतल हवाओं और बारिश के कारण ठंड का प्रकोप पूरे तीर्थ नगरी में बना रहा। श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और गाय माता सहित अन्य गौवंशों को ठंड से बचाने के लिए जगह–जगह अलाव जलाए गए। गर्म कपड़ों के बावजूद लोग अलाव का सहारा लेने को मजबूर दिखे।
कुशावर्त घाट पर संस्कारों की पवित्र छटा
कुमाऊँ मंडल से आए श्रद्धालुओं ने सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार किए
कुशावर्त घाट पर उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल से आए श्रद्धालुओं का विशेष दृश्य देखने को मिला। गंगा स्नान के उपरांत बच्चों के सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार अपने–अपने पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न किए गए।
पीत वस्त्र धारण किए बालकों के कान छेदन, यज्ञोपवीत धारण और गुरु मंत्र का उपदेश— पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी लगभग 1000 श्रद्धालु कुमाऊँ मंडल से हरिद्वार आकर यह पवित्र संस्कार कराते हैं।
पारंपरिक वेशभूषा बनी पहचान
कुमाऊँ की नाथ, चांदनी ओढ़नी और संस्कारों की गरिमा
कुमाऊँ से आई महिलाएं अपनी पारंपरिक वेशभूषा में बच्चों के साथ घाट पर बैठी दिखाई दीं। पीले–लाल रंग की छींटदार चांदनी ओढ़े, पारंपरिक नाथ और सादे श्रृंगार में उनकी अलग पहचान दूर से ही स्पष्ट हो रही थी—
यह दृश्य सांस्कृतिक विरासत की जीवंत तस्वीर था।
बारिश ने छीनी बसंत की उड़ान
पतंगों के बिना सूनी रही पंचपुरी, बच्चों के चेहरे उतरे
हरिद्वार की पंचपुरी में बसंत पंचमी पर पतंग उड़ाने की परंपरा है, लेकिन इस बार बे-मौसम बारिश ने उत्सव की रंगत फीकी कर दी। पतंगें नहीं उड़ सकीं, जो उड़ाई भी गईं वे भीगकर नीचे आ गईं।
पिछले एक सप्ताह से बच्चों ने नई–नई पतंगें और मांझा संभालकर रखा था, लेकिन बारिश ने सारे अरमान भिगो दिए। पतंगों के बिना बच्चे मायूस नजर आए— बसंत का उल्लास मौसम की मार से दब गया।
संदेश साफ़ है—आस्था मौसम की मोहताज नहीं
ठंड, बारिश और हवाओं के बीच भी गंगा स्नान की परंपरा अडिग
बसंत पंचमी 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि हरिद्वार में आस्था किसी मौसम की मोहताज नहीं।
ठंड हो या बारिश— माँ गंगा के प्रति श्रद्धा हर बाधा को पार कर लेती है।
✍️ — स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़
(तीर्थ, परंपरा और सत्य की आवाज़)