77वें गणतंत्र दिवस पर शहीदी पार्क में नहीं फहरा तिरंगा!, हरिद्वार में शहीदों की स्मृति का अपमान, लापरवाह तंत्र बेनकाब

स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से:


77वें गणतंत्र दिवस पर शहीदी पार्क में नहीं फहरा तिरंगा!


हरिद्वार में शहीदों की स्मृति का अपमान, लापरवाह तंत्र बेनकाब

हरिद्वार।आज जब पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गर्व और सम्मान के साथ मना रहा है, वहीं तीर्थ नगरी हरिद्वार में एक ऐसी शर्मनाक लापरवाही सामने आई, जिसने हर देशभक्त नागरिक का सिर झुका दिया।



शहीदों की स्मृति के लिए बना पार्क, पर तिरंगे से वंचित!

हरिद्वार के मुख्य हाईवे किनारे स्थित शहीदी पार्क—जिसे देश के अमर शहीदों की स्मृति को जीवित रखने के लिए बनाया गया था,जहां एक विशाल तिरंगा ध्वज लगाया गया ताकि👉 हर गुजरता यात्री,👉 हर श्रद्धालु,👉 हर भारतवासीयह न भूल सके कि यह आज़ादी हमें पूर्वजों के बलिदान से मिली है। आज उसी शहीदी पार्क में 

26 जनवरी के पावन दिन तिरंगा नहीं फहराया गया।


 
लापरवाह अधिकारियों की घोर उदासीनता उजागर

यह पार्क हरिद्वार 

रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित है और इसकी देखरेख की जिम्मेदारी हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) के पास है। लेकिन 

नाकारा तंत्र और संवेदनहीन अधिकारियों की वजह से—❌ न तिरंगा फहराया गया❌ न शहीदों को नमन किया गया❌ न गणतंत्र दिवस की गरिमा निभाई गई



कार्यालय पर फहरा तिरंगा, शहीदी पार्क उपेक्षित!

हैरानी की बात यह है कि👉 HRDA कार्यालय में तिरंगा समय से फहरा दिया गया  ताकि कोई यह न कह सके कि कार्यालय में झंडा नहीं फहराया गया।लेकिन👉 शहीदी पार्क, जो एकांत में नहीं बल्कि हाईवे किनारे है 👉 जहां हर गुजरती निगाह तिरंगे को देखकर गर्व से भर जाती थी, वहां आज 

तिरंगे की अनुपस्थिति ने पूरे शहर को शर्मिंदा कर दिया।


यह केवल लापरवाही नहीं, राष्ट्रीय अपमान है

शहीदी पार्क पर तिरंगा न फहराना—🔴 देश के शहीदों का अपमान है🔴 राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है🔴 हर भारतीय की भावना से खिलवाड़ है

यह सवाल आज हर नागरिक पूछ रहा है—

क्या ऐसे अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी?

या फिर इस राष्ट्रीय अपमान पर लीपापोती कर दी जाएगी?


कार्रवाई होगी या फाइलों में दफन हो जाएगा सम्मान?

देश का अपमान तो हो चुका।  अब देखना यह है कि—✔️ जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है❌ या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता हैयह खबर नहीं, चेतावनी है—कि अगर शहीदों की स्मृति भी सुरक्षित नहीं,तो राष्ट्रभाव की रक्षा कौन करेगा?


✍️ — स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़

(कलम जो राष्ट्र के सम्मान पर आँच नहीं आने देती)