✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से


काशी उतर आई हरिद्वार में — चेतन ज्योति घाट पर मां गंगा की दिव्य महाआरती ने रच दिया आध्यात्मिक इतिहास


भूपतवाला में गूंजे वैदिक मंत्र, तीन घंटे तक भक्त डूबे रहे मां गंगा की आराधना में

हरिद्वार की पवित्र धरती पर इन दिनों एक ऐसा दिव्य दृश्य साकार हो रहा है, जो केवल देखा नहीं — अनुभव किया जाता है। भूपतवाला क्षेत्र स्थित चेतन ज्योति घाट पर गंगा सप्तमी से निरंतर हो रही मां गंगा की महाआरती ने तीर्थ नगरी के आध्यात्मिक स्वरूप को एक नई ऊँचाई पर पहुंचा दिया है।

यह कोई साधारण आरती नहीं,  यह वह आराधना है जिसमें मन, प्राण और आत्मा — तीनों मां गंगा के चरणों में समर्पित हो जाते हैं। आरती देखते ही ऐसा लगता है मानो भक्त स्वयं भवसागर से उतरकर मां गंगा की गोद में बैठ गया हो।



संकीर्तन से लेकर शिवतांडव तक — हर पल साक्षात् काशी का अनुभव

स्वामी ऋषिश्वरानन्द महाराज ने बताया कि चेतन ज्योति घाट पर होने वाली यह महाआरती पूरी तरह काशी की तर्ज पर संपन्न होती है।

आरती की क्रमबद्ध दिव्यता कुछ इस प्रकार है —

🔱 सबसे पहले

मां गंगा भगवती के चरणों में संकीर्तन

🔱 फिर

मां गंगा की स्तुति

🔱 इसके बाद

भव्य गंगा आरती

🔱 तत्पश्चात

धूनी आरती

🔱 फिर

शिवतांडव स्तोत्र

🔱 और अंत में

पुनः मां गंगा की स्तुति

यह पूरा क्रम लगभग तीन घंटे चलता है, जिसमें हर मंत्र, हर स्वर, हर श्लोक — भक्तों को मां गंगा की चेतना से जोड़ देता है।



काशी से आए विद्वानों ने सिखाई आरती, हरिद्वार के छात्रों ने रचा इतिहास

स्वामी ऋषिश्वरानन्द महाराज ने बताया कि इस आरती की शुद्धता और दिव्यता के लिए  काशी से विशेष वैदिक विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया थाजिन्होंने चेतन ज्योति के संस्कृत विद्यार्थियों को यह आरती महीनों तक सिखाई।

आज वही विद्यार्थी  हरिद्वार में ठीक उसी वैदिक मर्यादा और भाव से मां गंगा की आरती कर रहे हैं जैसी काशी के दशाश्वमेध घाट पर होती है।



“हर घाट पर हो ऐसी आरती — तभी मां गंगा हर हृदय में बसेंगी”

स्वामी ऋषिश्वरानन्द महाराज का स्पष्ट संदेश है —

“मां गंगा के प्रत्येक घाट पर ऐसी ही दिव्य और भव्य आरती होनी चाहिए।

जब हर घाट से मंत्रों की सुगंध उठेगी, 

तभी मां गंगा हर व्यक्ति के दिल में बसेंगी।”

उन्होंने इस पुनीत कार्य के लिए  श्री गंगा सभा और पुरोहित समाज का भी आभार व्यक्त किया और बताया कि इस आध्यात्मिक अभियान में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।



तीन घंटे तक बहती रहती है मंत्रों की गंगा

चेतन ज्योति घाट पर यह आरती केवल एक अनुष्ठान नहीं,  यह एक आध्यात्मिक प्रवाह है — जिसमें मंत्रों की धारा

तीन घंटे तक निरंतर बहती रहती है।

इस दौरान  भक्त समय भूल जाते हैं, दुनिया भूल जाती है,  और केवल मां गंगा का सान्निध्य शेष रह जाता है।



गंगा की सुगंध पूरी दुनिया में फैलनी चाहिए

हरिद्वार मां गंगा का तीर्थ है। यदि चेतन ज्योति घाट जैसी आरती हर घाट पर होने लगे, तो न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया मां गंगा की आध्यात्मिक सुगंध से भर जाएगी।

आज चेतन ज्योति घाट पर जो दीप जल रहे हैं, वे केवल घी के नहीं — आस्था, भक्ति और चेतना के दीप हैं।

और जब तक मां गंगा की यह दिव्य आरती गूंजती रहेगी, हरिद्वार केवल तीर्थ नहीं — चलती हुई काशी बना रहेगा।

— स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़