✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से


 “कोहरे की चादर में लिपटी धर्मनगरी हरिद्वार”

हर की पौड़ी से सड़कों तक सफेदी, ठंड ने रोक दी शहर की रफ्तार

हरिद्वार।आज सुबह करीब 3 बजे से ही घना कोहरा तीर्थ नगरी हरिद्वार पर इस कदर छा गया कि पूरी धर्मनगरी सफेद चादर में ढक गई। विश्व विख्यात हर की पौड़ी, मंदिरों के शिखर, गंगा घाट और मुख्य सड़कें — सब कुछ धुंध में विलीन होता चला गया। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो प्रकृति ने श्रद्धा की इस नगरी को अपनी बाहों में जकड़ लिया हो।


कोहरे में गुम हो गई हर की पौड़ी

जहां प्रतिदिन मां गंगा की आरती की रोशनी और श्रद्धालुओं के जयकारे गूंजते हैं, वहां आज मंदिरों की आकृतियां तक धुंधली दिखाई दे रही हैं। हर की पौड़ी, जो करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, आज कोहरे के परदे के पीछे छिपी हुई नजर आ रही है।


🔥 अलाव बने जीवन रक्षक, ऊनी कपड़े बने ढाल

कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाओं से बचने के लिए शहर के हर कोने में अलाव जलते हुए दिखाई दे रहे हैं।दुकानदारमजदूरयात्री और श्रद्धालु — सभी अलाव के चारों ओर खड़े होकर खुद को गर्म रखने की जद्दोजहद कर रहे हैं।लोग सिर से पैर तक ऊनी कपड़ों में लिपटे हुए ऐसे निकल रहे हैं, जैसे ठंड से लड़ने के लिए कोई कवच पहन लिया हो।


🚗 सड़कों पर कोहरे का पहरा, रफ्तार पर ब्रेक

घने कोहरे ने हरिद्वार की सड़कों पर भारी असर डाला है।  मुख्य मार्गों पर वाहन पीली लाइट और हेडलाइट जलाकर बेहद धीमी गति से चल रहे हैं। ड्राइवर पूरी सतर्कता के साथ वाहन चला रहे हैं, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।ऐसा लग रहा है जैसे कोहरे ने पूरी तीर्थ नगरी की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया हो।


 कल बर्फीली हवाएं, आज कोहरे का कहर

कल हरिद्वार तेज बर्फीली हवाओं से कांप रहा था,और आज

घना कोहरा पूरे शहर को निगल चुका है।ठंड, धुंध और सन्नाटा —इन तीनों ने मिलकर

धर्मनगरी को किसी हिमलोक में बदल दिया है।


 ठंड के बीच भी जलती आस्था

हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, मां गंगा के प्रति श्रद्धा आज भी हर दिल में जीवित है।कोहरा आंखों को ढक सकता है, लेकिन आस्था को नहीं।हरिद्वार आजठंड और धुंध से जूझ रहा है, पर श्रद्धा की लौ अब भी प्रज्वलित है।