शंकराचार्य पर प्रहार = सनातन पर प्रहार

मातृ सदन, हरिद्वार में प्रयागराज घटना के विरोध में फूटा जनाक्रोश

हरिद्वार | 21 जनवरी

प्रयागराज में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम नोज पर परमाराध्य ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज एवं उनके शिष्यों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की गई बर्बरता, अभद्रता और बल प्रयोग के विरोध में आज मातृ सदन, हरिद्वार में एक वृहद जनाक्रोश बैठक एवं तीखी प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।

यह केवल एक संत का अपमान नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक आत्मा पर सीधा हमला बताया गया।


 “24 घंटे में प्रमाण दो” — भारत की आत्मा को कटघरे में खड़ा करने की साज़िश

स्वामी शिवानंद जी महाराज का प्रशासन पर करारा प्रहार

सभा को संबोधित करते हुए स्वामी  शिवानंद जी महाराज ने कहा—

“शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च आध्यात्मिक पद पर आसीन संत से 24 घंटे में ‘प्रामाणिकता सिद्ध करने’ की मांग करना, इस राष्ट्र की आत्मा पर प्रहार है।”

उन्होंने तीखे शब्दों में सवाल उठाया कि किस मेला अधिकारी ने यह दुस्साहस किया कि वह शंकराचार्य की वैधता पर प्रश्न करे।

यह कृत्य संविधान, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना—तीनों का अपमान है।


साधु-संन्यासियों की चुप्पी भी अपराध

“आज मौन, कल विनाश” की चेतावनी

स्वामी शिवानंद जी ने देशभर के साधु-संन्यासियों की चुप्पी पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा—

“यह चुप्पी अज्ञान की नहीं, सत्ता से लाभ उठाने की मानसिकता की उपज है।”

उन्होंने चेतावनी दी कि—

“आज शंकराचार्य पर प्रहार हुआ है, कल यह आग हर आश्रम, हर मठ और हर संन्यासी तक पहुँचेगी।”


‘सनातन की रक्षा’ का झूठा नारा बेनकाब

UKD नेता कैप्टन राकेश ध्यानी का सीधा सवाल

उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के वरिष्ठ नेता कैप्टन राकेश ध्यानी ने कहा—

“यह प्रशासन अब अपने नैतिक और संवैधानिक पतन के अंतिम स्तर पर पहुँच चुका है।”

उन्होंने पूछा—

“सनातन की रक्षा के नाम पर आखिर किसे बचाया जा रहा है, जब आस्था के केंद्रों पर ही डंडे बरसाए जा रहे हैं?”


 यह केवल संत नहीं, संस्कृति पर हमला है

पूर्व नौसेना अधिकारी प्रकाश चंद थपलियाल

पूर्व नौसेना अधिकारी एवं उत्तराखंड भूतपूर्व सैनिक संगठन के संरक्षक श्री प्रकाश चंद थपलियाल ने इसे

प्रशासनिक पतन की पराकाष्ठा बताते हुए कहा—

“यह घटना भारत की सांस्कृतिक रीढ़ पर किया गया सीधा वार है।”


 संत, किसान और युवा—सबके आत्मसम्मान पर चोट

किसान मंच व बेरोज़गार संगठनों का हुंकार

किसान मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता भोपाल सिंह चौधरी एवं बेरोज़गार संघ के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा—

“संतों, किसानों और आम जनमानस के आत्मसम्मान के साथ ऐसा व्यवहार अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”


संस्थाओं को तोड़ने के बाद अब आस्था पर वार

डॉ. विजय वर्मा का गंभीर विश्लेषण

डॉ. विजय वर्मा ने कहा—

“देश की संस्थाओं को क्रमबद्ध ढंग से कमजोर करने के बाद अब सीधा हमला हमारे मूल विश्वासों पर हो रहा है।”


आध्यात्मिकता से भयभीत मानसिकता उजागर

दंडी स्वामी देवाश्रम

दंडी स्वामी देवाश्रम  ने कहा—

“यह घटना उन लोगों की सोच को उजागर करती है, जिन्हें वास्तविक आध्यात्मिकता से भय है।”


सत्ता की नीतियाँ महिलाओं की गरिमा पर भी हमला

सुनीता  का सशक्त वक्तव्य

श्रीमती सुनीता ने कहा कि—

“यह दौर महिलाओं की गरिमा पर भी हमला कर रहा है, जिसका उदाहरण अंकिता भंडारी प्रकरण है।”


 संघर्ष केवल विरोध नहीं, न्याय तक जाएगा

मातृ सदन का ऐलान

बैठक के अंत में मातृ सदन, हरिद्वार की ओर से स्पष्ट किया गया कि—

✔️ यह संघर्ष विरोध तक सीमित नहीं रहेगा

✔️ फौजदारी एवं सिविल मानहानि की कार्रवाई की जाएगी

✔️ विधिक, संवैधानिक और लोकतांत्रिक मार्ग से न्याय लिया जाएगा

देश के आध्यात्मिक शिखर पर आसीन संत की गरिमा,

संत समाज के सम्मान और

सनातन संस्कृति की रक्षा—अब एक संकल्प है।


✍️ — स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़

(कलम जो सत्ता से नहीं, सत्य से चलती है)