
शंकराचार्य अपमान पर सड़कों पर उतरा जनाक्रोश
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सिर मुंडवाकर जताया विरोध, “ब्राह्मण अपमान = राष्ट्र अपमान”
भाजपा सरकार ब्राह्मणों की पहचान मिटाने पर तुली – अशोक शर्मा
हरिद्वार, 21 जनवरी।
प्रयागराज के माघ मेले में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एवं उनके शिष्यों के साथ की गई अभद्रता के विरोध में मंगलवार को हरिद्वार का चंद्राचार्य चौक जनाक्रोश का केंद्र बन गया। कांग्रेस के पूर्व सभासद एवं कार्यकर्ताओं ने सिर मुंडवाकर अपना विरोध दर्ज कराया और इसे सनातन परंपरा, ब्राह्मण अस्मिता और राष्ट्र की आत्मा पर सीधा प्रहार बताया।
“शिखा खींचना केवल व्यक्ति नहीं, परंपरा का अपमान”
वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व सभासद अशोक शर्मा ने कहा—
“प्रयागराज में एक बटुक ब्राह्मण की शिखा खींचना केवल एक व्यक्ति का नहीं,
बल्कि पूरी सनातन परंपरा का अपमान है।
शिखा ब्राह्मण की पहचान है,
और भाजपा सरकार उस पहचान को मिटाने पर आमादा है।”
उन्होंने कहा कि जो सरकार स्वयं को सनातन की रक्षक बताती है, उसी के शासन में शंकराचार्य और ब्राह्मणों के साथ अभद्रता होना अत्यंत निंदनीय है।
“अब समय आ गया है कि समस्त ब्राह्मण समाज एकजुट होकर इसके विरुद्ध आवाज उठाए।”
“ब्राह्मण जागा तो अहंकारी सत्ता का अंत तय”
इस विरोध प्रदर्शन में उत्तराखंड ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष पदम प्रकाश शर्मा और
श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक विशेष रूप से उपस्थित रहे।
दोनों ने एक स्वर में कहा—
“जिस दिन ब्राह्मण समाज पूरी तरह जाग गया,
उस दिन अहंकारी सरकार का पतन तय है।
शंकराचार्य के साथ अभद्रता कर सत्ता क्या संदेश देना चाहती है?”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन राज्य से राष्ट्रव्यापी स्वरूप लेगा।
“ब्राह्मण पूजनीय हैं, अपमान बर्दाश्त नहीं”
कांग्रेस अनुसूचित विभाग के जिलाध्यक्ष तीर्थपाल रवि और पार्षद सुनील कुमार ने कहा—
“ब्राह्मण समाज सदैव पूजनीय रहा है।
उनका अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अब भाजपा सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।”
धरने में शामिल रहे अनेक जनप्रतिनिधि व कार्यकर्ता
इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, सामाजिक प्रतिनिधि और ब्राह्मण समाज के लोग शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से— पार्षद सोहित सेठी, हिमांशु गुप्ता, पूर्व पार्षद नेपाल सिंह, रवि बाबू शर्मा, अखिल त्यागी, ऋषभ वशिष्ठ, तरुण व्यास, पुनीत कुमार, मनोज सैनी, नकुल माहेश्वरी, एमडी शर्मा, सोम त्यागी, प्रेम शर्मा, आशु भारद्वाज, सार्थक ठाकुर,अमन शर्मा, यश शर्मा, दिव्यांश अग्रवाल, अनिल भास्कर, नीटू शर्मा, आशु श्रीवास्तव, लक्की महाजन, नासिर गौड, रिंकू शर्मा, अमित रस्तोगी, समर्थ अग्रवाल, मनोज जाटव, सागर बेनीवाल सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
निष्कर्ष | यह केवल विरोध नहीं, चेतावनी है
चंद्राचार्य चौक पर हुआ यह प्रदर्शन केवल राजनीतिक विरोध नहीं था,
बल्कि सनातन संस्कृति, शंकराचार्य परंपरा और ब्राह्मण अस्मिता की रक्षा का संकल्प था।
“शंकराचार्य का अपमान = सनातन का अपमान
और सनातन का अपमान = राष्ट्र का अपमान”
— यही संदेश हरिद्वार की धरती से सत्ता तक पहुँचा।