
✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से
हर की पौड़ी की मर्यादा पर रात का हमला!
ब्रिटिश कालीन नियमों वाली शिलापट गायब, सुरक्षा व्यवस्था बेनकाब
सीसीटीवी, पुलिस चौकी, 24 घंटे पहरा— फिर भी चोरी!
आख़िर किसकी चाल है यह, जो सनातन संस्कृति से खिलवाड़ कर रहा है?हरिद्वार।विश्व विख्यात तीर्थ हर की पौड़ी— जहाँ हर पत्थर में आस्था, हर सीढ़ी में सनातन संस्कार और हर लहर में गंगा की पवित्रता बसती है— आज एक गंभीर साजिश का शिकार होती दिखाई दे रही है।अंग्रेज़ों के जमाने से स्थापित वह ऐतिहासिक तिकोनी शिलापट, जिस पर तीनों ओर अलग-अलग भाषाओं में हर की पौड़ी की पवित्रता बनाए रखने के सख्त नियम अंकित थे, रातों-रात चोरी-छिपे हटा दी गई।
यह कोई सामान्य पत्थर नहीं था, बल्कि हर की पौड़ी की मर्यादा, अनुशासन और धार्मिक गरिमा का लिखित विधान था।
नियम इसलिए नागवार थे क्योंकि वे पाप पर रोक थे
नगर पालिका अधिनियम 1916 के तहत स्थापित यह शिलापट इसलिए लगाई गई थी ताकि—
- गंगा घाट व्यापार का अड्डा न बने
- धार्मिक स्थल तमाशा स्थल न बने
- पवित्रता पर मुनाफाखोरी हावी न हो
लेकिन यही नियम कुछ लोगों को नागवार गुजर रहे थे।और परिणाम— शिलापट ही गायब कर दी गई।
100 मीटर दूर पुलिस चौकी, हर कोना सीसीटीवी से लैस— फिर भी चोरी कैसे?
सबसे चौंकाने वाला सवाल यह है कि—
- शिलापट के कुछ ही मीटर की दूरी पर हर की पौड़ी पुलिस चौकी मौजूद है
- 24 घंटे सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं
- सीसीटीवी कैमरे दिन-रात निगरानी करते हैं
- अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करते हैं
फिर भी—❓ शिलापट कैसे हट गई?❓ किसने हटाई?❓ किस समय हटाई?❓ सीसीटीवी में कुछ क्यों नहीं दिखा?❓ ड्यूटी पर तैनात जवानों को कुछ पता क्यों नहीं चला?
यह लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर सुरक्षा चूक या सुनियोजित चुप्पी का मामला प्रतीत होता है।
मुकदमा क्यों नहीं? कार्रवाई क्यों नहीं? चुप्पी क्यों?
यदि यह चोरी है—
- तो मुकदमा दर्ज क्यों नहीं हुआ?
- सीसीटीवी फुटेज खंगाले क्यों नहीं गए?
यदि यह जानबूझकर हटाई गई—
- तो किसके आदेश पर?
- किसके संरक्षण में?
और यदि सब कुछ सुरक्षा के बीच हुआ—
- तो ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
- सीसीटीवी निगरानी में बैठे कर्मियों से जवाब-तलब क्यों नहीं?
यह घटना यह साबित करती है कि
हर की पौड़ी की सुरक्षा में बहुत बड़ा छेद है।
यह शिलापट नहीं, सनातन के नियम हटाए जा रहे हैं
आज सवाल केवल एक पत्थर का नहीं है।सवाल है—
क्या हर की पौड़ी को धीरे-धीरे नियमविहीन, व्यापारिक और मनमानी का अड्डा बनाया जा रहा है?
क्या यह—
- घाट कब्जाने की साजिश है?
- नियमों से छुटकारा पाने की चाल है?
- सनातन संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश है?
संत समाज का चेतावनी भरा आक्रोश
इस पूरे प्रकरण पर हर की पौड़ी पहुंचे संत महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
“यह सनातन संस्कृति से खिलवाड़ है। जो लोग हर की पौड़ी की मर्यादा नष्ट करना चाहते हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। तुरंत नई शिलापट स्थापित की जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो संत समाज आंदोलन करेगा।”
उनके शब्दों में साफ चेतावनी थी—
अब चुप्पी नहीं, प्रतिकार होगा।
हर की पौड़ी कोई बाजार नहीं, सनातन की आत्मा है
हर की पौड़ी—
- सरकार की नहीं
- प्रशासन की नहीं
- किसी ठेकेदार या व्यापारी की नहीं
यह सनातन समाज की अमानत है।और इस अमानत से छेड़छाड़ करने वालों को यह समझ लेना चाहिए कि—
शिलापट हटाई जा सकती है,
पर सनातन की चेतना नहीं।
अब देखना यह है कि—
- क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?
- क्या सुरक्षा व्यवस्था पर गाज गिरेगी?
- या फिर यह मामला भी गंगा की लहरों में दबा दिया जाएगा?
✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़