
शंकराचार्य और ब्राह्मणों के सम्मान में सड़कों पर उतरी कांग्रेस
हरिद्वार में गूंजा प्रतिरोध, अशोक शर्मा के नेतृत्व में निकली ऐतिहासिक पदयात्रा
हरिद्वार | स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ – विशेष रिपोर्ट
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर जगद्गुरु शंकराचार्य एवं ब्राह्मण समाज के साथ हुई अभद्रता के विरोध में आज हरिद्वार तीर्थ नगरी की सड़कों पर जनाक्रोश फूट पड़ा। कांग्रेस नेता एवं पूर्व सभासद अशोक शर्मा के नेतृत्व में दूधाधारी चौक से चंद्राचार्य चौक तक भव्य पदयात्रा निकाली गई, जिसमें दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारों के साथ शंकराचार्य व ब्राह्मण समाज के समर्थन में हुंकार भरी।
तीर्थ पथ पर गूंजा प्रतिरोध
हर की पौड़ी से देवपुरा तक दिखा आस्था और आक्रोश का संगम
यह पदयात्रा
दूधाधारी चौक → भूपतवाला सुखी नदी → भीमगोड़ा → हर की पौड़ी → दत्तात्रेय चौक → बाल्मीकि चौक → शिव मूर्ति चौक → बस अड्डा → रेलवे स्टेशन → देवपुरा चौक → पंडित मदन मोहन मालवीय चौक → परशुराम चौक होते हुए चंद्राचार्य चौक पर समाप्त हुई।
पूरे मार्ग में
👉 “शंकराचार्य का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान”
👉 “ब्राह्मण सम्मान दो”
👉 “सरकार होश में आओ”
जैसे नारों से वातावरण गूंजता रहा।
“शंकराचार्य का अपमान = ब्राह्मण समाज का अपमान”
अशोक शर्मा का सरकार को दो टूक संदेश
चंद्राचार्य चौक पर पदयात्रा के समापन अवसर पर कांग्रेस नेता अशोक शर्मा ने तीखे शब्दों में कहा—
“शंकराचार्य और ब्राह्मणों के अपमान के विरोध में हम चुप नहीं बैठेंगे।
यह संघर्ष तब तक चलेगा, जब तक शंकराचार्य प्रयागराज में धरने पर बैठे हैं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि—
“ब्राह्मणों का अपमान और शंकराचार्य का अपमान हम किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेंगे।”
सरकार की ‘बुद्धि शुद्धि’ के लिए हवन का ऐलान
संघर्ष केवल नारे नहीं, सांस्कृतिक प्रतिकार भी
अशोक शर्मा ने आगे घोषणा करते हुए कहा कि—
“सरकार की बुद्धि शुद्धि के लिए हवन किया जाएगा।
यह केवल राजनीतिक नहीं, धार्मिक और सांस्कृतिक संघर्ष है।”
उन्होंने कहा कि जब तक सनातन की सर्वोच्च परंपरा पर आघात होता रहेगा, तब तक विरोध, पदयात्रा और जनजागरण जारी रहेगा।
हरिद्वार की सड़कों से सत्ता को चेतावनी
आस्था के अपमान पर अब मौन नहीं
आज की पदयात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया कि—
🔸 यह केवल एक व्यक्ति का नहीं,
🔸 यह केवल एक संप्रदाय का नहीं,
🔸 बल्कि सनातन चेतना और ब्राह्मण सम्मान का प्रश्न बन चुका है।
हरिद्वार की पावन भूमि से उठी यह आवाज
अब सत्ता के गलियारों तक गूंजने लगी है।
✍️ — स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़
(जो लिखता है वही, जो कहती है ज़मीर की आवाज़)