✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से


मौनी अमावस्या पर सनातन का अपमान!


शंकराचार्य को रोका, ब्राह्मणों की शिखा खींची, पुलिसिया बर्बरता से उबला संत समाज


हरिद्वार की हर की पौड़ी पर गूंजा आक्रोश— “ब्राह्मण समाज का अपमान, राष्ट्र का अपमान”

हरिद्वार।प्रयागराज में मौनी अमावस्या के पावन स्नान पर्व पर जगद्गुरु शंकराचार्य को स्नान से रोके जाने, तथा ब्राह्मणों की शिखा (चोटी) पकड़कर खींचे जाने, लातों से मारने और घसीटने की घटनाओं ने पूरे सनातन समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना केवल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, ब्राह्मण समाज और राष्ट्र की आत्मा का अपमान है।

जिस प्रदेश में राजा स्वयं संत होने का दावा करता हो, वहाँ इस प्रकार का कृत्य होना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह सत्ता के अहंकार और प्रशासनिक संवेदनहीनता को भी उजागर करता है।



हर की पौड़ी पर संतों का आक्रोश

अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में धरनाइस अपमानजनक कृत्य के विरोध में हरिद्वार की पावन हर की पौड़ी, घंटाघर पर श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष अधीर कौशिक के नेतृत्व में संतों और ब्राह्मण समाज ने धरना देकर तीव्र विरोध दर्ज कराया।धरना स्थल पर वातावरण आक्रोश, वेदना और चेतावनी से भरा हुआ था।

धरने पर उपस्थित संतों और ब्राह्मणों ने एक स्वर में कहा—

“ब्राह्मण समाज का अपमान केवल एक वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का अपमान है।”


“सनातन के नाम पर सत्ता, लेकिन कर्म सनातन विरोधी”

धरने में वक्ताओं ने तीखे शब्दों में कहा कि—

“जो सरकार सनातन धर्म और धाम के नाम पर सत्ता में आई है, वही सरकार आज सनातन के मूल स्तंभ—शंकराचार्य और ब्राह्मण समाज—का अपमान करवा रही है।”

एक-एक कर ब्राह्मण समाज के लोगों ने अपने मुखारविंद से संबोधन करते हुए कहा कि पुलिस के जिन जवानों ने शिखा पकड़कर ब्राह्मणों को घसीटा, उन्होंने न केवल कानून तोड़ा है, बल्कि सनातन संस्कृति की मर्यादा को पैरों तले रौंदा है


अधीर कौशिक का सीधा आरोप

“ऐसी सरकार की हम घोर निंदा करते हैं”

श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष अधीर कौशिक ने स्पष्ट शब्दों में कहा—

“हम ऐसी सरकार की घोर निंदा करते हैं, जो ब्राह्मणों और शंकराचार्य का अपमान कर रही है। शिखा पकड़कर घसीटना, लात मारना—यह केवल बर्बरता नहीं, बल्कि सनातन पर सीधा हमला है जब तक दोशियो पर कर्यवाही नही होती मैं जब तक अपनी शिखा नही बांधुंगा।”

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन देशव्यापी रूप लेगा।



“शंकराचार्य असली या फर्जी— यह सरकार तय नहीं करेगी”

महामंडलेश्वर प्रबोधानंद गिरि महाराज का दो-टूक

इस अवसर पर महामंडलेश्वर प्रबोधानंद गिरि महाराज ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा—

“शंकराचार्य और ब्राह्मणों का अपमान अत्यंत निंदनीय है। सरकार को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं कि शंकराचार्य असली हैं या फर्जी। यह निर्णय केवल संत समाज करेगा, क्योंकि संत परंपरा बाल्यकाल से तप और साधना से निर्मित होती है।”

उन्होंने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य चार पीठों में से एक पीठ पर विराजमान हैं, और उनके गुरुओं की परंपरा स्वयं विद्वता और तप की धरोहर रही है।


माफी या आंदोलन— संत समाज का अल्टीमेटम

धरने में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि—

“या तो सरकार जगद्गुरु शंकराचार्य से जाकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगे,

या फिर संत समाज और ब्राह्मण समाज एक बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा।”

संतों ने कहा कि यह लड़ाई केवल प्रयागराज की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन की अस्मिता, ब्राह्मण की शिखा और धर्म की मर्यादा की लड़ाई है।


यह केवल विरोध नहीं, चेतावनी है

हर की पौड़ी से उठा यह स्वर अब स्पष्ट कर रहा है कि सनातन सहनशील है, लेकिन अपमान के आगे मौन नहीं। यदि समय रहते दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन देश की हर तीर्थनगरी और हर पीठ तक पहुँचेगा।

✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़