शांतिकुंज शताब्दी महोत्सव: बैरागी कैंप में बस रहा है ‘ऋषि नगर’, हरिद्वार में अवतरित हो रही है दिव्य धर्मनगरी
जहां हर द्वार पर ऋषि वाणी, हर पग पर साधना और हर श्वास में गायत्री मंत्र
हरिद्वार।
तीर्थ नगरी हरिद्वार में शांतिकुंज के शताब्दी समारोह को लेकर बैरागी कैंप क्षेत्र में एक ऐसा भव्य और दिव्य नगर आकार ले रहा है, जो देखने में किसी कुंभ से कम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से उससे भी अधिक सुव्यवस्थित और पवित्र प्रतीत हो रहा है। यह नगर केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि तप, साधना, सेवा और संकल्प से गढ़ा जा रहा है।

ऋषियों के नाम पर विशाल द्वार, संस्कृत श्लोकों से सुसज्जित प्रवेश
शांतिकुंज द्वारा बसाए जा रहे इस विशेष नगर के चारों ओर भव्य, विशाल और अत्यंत आकर्षक द्वार बनाए गए हैं।
प्रत्येक द्वार का नाम ऋषियों के नाम पर रखा गया है—
ऋषि अत्रि नगर, ऋषि भागीरथ नगर जैसे नाम नगर में प्रवेश करते ही एक आध्यात्मिक लोक का अनुभव कराते हैं।
हर द्वार पर संस्कृत श्लोक और युग निर्माण का संदेश अंकित है—
“हम बदलेंगे युग बदलेगा, हम सुधरेंगे युग सुधरेगा।”

मां भगवती भोजनालय और वॉटरप्रूफ प्रवचन पंडाल
नगर के केंद्र में मां भगवती भोजनालय का निर्माण किया गया है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु एक साथ बैठकर सामूहिक भोजन कर सकेंगे।
इसके साथ ही विशाल वॉटरप्रूफ पंडाल तैयार किए गए हैं, जिनमें हजारों-लाखों श्रद्धालु एक साथ प्रवचन, सत्संग और युग संदेश सुन सकेंगे।
🔥 सामूहिक जप-साधना और 108 तीर्थों का दिव्य संगम
नगर में सामूहिक जप-साधना अनुष्ठान के लिए विशेष पंडाल बनाए गए हैं। यहां देशभर के 108 पवित्र तीर्थों की रज और जल को पवित्र कलशों में स्थापित किया गया है, जो रात्रि में जब प्रकाश से आलोकित होते हैं, तो पूरा क्षेत्र स्वर्गलोक जैसा प्रतीत होता है।

🪔 प्रखर प्रज्ञा – सजल श्रद्धा का पावन संगम
एक विशेष पूज्य स्थल पर

एक ओर “प्रखर प्रज्ञा”
और दूसरी ओर “सजल श्रद्धा” अंकित है।
यहां आचार्य श्रीराम शर्मा और मां भगवती की प्रतिमाएं गुलाबी कमल पर स्थापित की गई हैं।
ऐसा प्रतीत होता है मानो दोनों दिव्य विभूतियां खड़े होकर आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को आशीर्वाद दे रही हों।
🌼 गुलाब, गेंदा और कमल से सजा साधना लोक
पूरे नगर में पवित्रता और सौंदर्य का विशेष ध्यान रखा गया है।
गुलाब, गेंदा और विशेष पुष्प मालाओं से स्थल सजाए गए हैं।
आचार्य श्रीराम शर्मा की कमल पर खड़ी विशाल फोटो श्रद्धालुओं को गहन ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान कर रही है।
👕 न मजदूर, न मालिक—सिर्फ स्वयंसेवक
इस नगर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि
यहां न कोई मजदूर है, न कोई मालिक।
पूरा नगर पीले वस्त्रों में सजे स्वयंसेवकों द्वारा सजाया जा रहा है, जो सेवा को ही साधना मानकर दिन-रात जुटे हैं।
🏥 कुंभ जैसी व्यवस्थाएं: खोया-पाया से मीडिया सेंटर तक
नगर में—
- कुंभ की तर्ज पर खोया-पाया केंद्र
- अस्पताल
- मीडिया सेंटर
- पंजीकरण स्थल
- वाचनालय
- फोटोग्राफी पंडाल
जैसी सभी व्यवस्थाएं की गई हैं।
हर पंडाल के सामने कूड़ेदान, वृक्षों के गमले और सफेद रंग से सजे पत्थरों की बाढ़ नगर को अत्यंत सुंदर और सुव्यवस्थित बना रही है।
🔊 हर श्वास में गायत्री मंत्र
पूरे नगर में लगाए गए लाउडस्पीकरों से
गायत्री मंत्र का मधुर जप
दिन-रात धीमी स्वर में चलता रहेगा, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा।
🌍 विश्वभर से आएंगे श्रद्धालु
शांतिकुंज के इस शताब्दी समारोह में
पूरे विश्व से जुड़े श्रद्धालु भाग लेंगे।
आने वाले दिनों में यह नगर कुंभ की तरह जनसमूह से भर जाएगा।
⏳ 20 दिन बाद पूर्णता, दो माह से चल रही तैयारी
इस दिव्य आयोजन की तैयारियां पिछले दो महीनों से निरंतर चल रही हैं।
अभी आयोजन में लगभग 20 दिन शेष हैं, और तब तक यह नगर पूर्ण रूप से जगमगा उठेगा।
✍️ निष्कर्ष
बैरागी कैंप में बस रहा यह नगर सिर्फ एक आयोजन स्थल नहीं, बल्कि युग चेतना, साधना और सेवा का जीवंत केंद्र है।
यह नगर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए केवल देखने की चीज नहीं, बल्कि अनुभव करने का दिव्य लोक होगा।
— स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़