✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से


 कुंभ और गंगा की मर्यादा पर निर्णायक आवाज

 गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध ऐतिहासिक, शास्त्रसम्मत और जनभावनाओं के अनुरूप

हरिद्वार | 8 जनवरी 2026देवभूमि उत्तराखण्ड में स्थित हरिद्वार एवं ऋषिकेश के पवित्र गंगा घाट केवल भौगोलिक संरचनाएं नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सनातन परंपरा, आस्था, साधना और मोक्ष की चेतना के जीवंत प्रतीक हैं। गंगा के ये घाट तप, त्याग, स्नान, दान और आत्मशुद्धि की उस परंपरा को जीवित रखते हैं, जिस पर सम्पूर्ण हिन्दू संस्कृति गर्व करती है।



कुंभ मेला: आयोजन नहीं, हिन्दू चेतना का महापर्व

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र

विशेष रूप से कुंभ मेला क्षेत्र विश्व पटल पर हिन्दू आस्था का सर्वोच्च प्रतीक है, जहाँ शास्त्रोक्त मर्यादाओं के साथ स्नान और अनुष्ठान किए जाते हैं। कुंभ केवल एक मेला नहीं, बल्कि हिन्दू समाज की सामूहिक आत्मा, संयम और पवित्रता का उत्सव है।



📜 110 वर्ष पुरानी नियमावली ने फिर खोला सच

गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पहले से था प्रतिबंध

हाल ही में प्रकाशित समाचारों से यह तथ्य पुनः सामने आया है कि 

हरिद्वार नगर पालिका की 110 वर्ष पुरानी नियमावली (1916 एवं 1953) में—➡️ हर की पैड़ी➡️ अन्य पवित्र गंगा घाट➡️ कुंभ मेला क्षेत्र

में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर स्पष्ट प्रतिबंध दर्ज है।

यह कोई नया निर्णय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मर्यादाओं की रक्षा हेतु पूर्व से लागू नियम है, जिसे समय के साथ शिथिल कर दिया गया।



⚠️ गंगा की निर्मलता पर बढ़ता खतरा

मांस-मदिरा और अपवित्र गतिविधियों से आहत हिन्दू समाज

गत वर्षों में गंगा घाटों और आसपास के क्षेत्रों में❌ मांस❌ मदिरा❌ अन्य अपवित्र गतिविधियों

की घटनाओं ने हिन्दू समाज की भावनाओं को गहरा आघात पहुँचाया है। यह केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि आस्था और धार्मिक अस्मिता का प्रश्न बन चुका है।



🔱 विश्व हिन्दू परिषद की तीन टूक मांग

अब नहीं चलेगी ढिलाई

विश्व हिन्दू परिषद, उत्तराखण्ड के प्रांत अध्यक्ष रविदेव आनंद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि—

🔸 प्रमुख मांगें:

1️⃣ कुंभ मेला क्षेत्र एवं सभी पवित्र गंगा घाटों को धार्मिक मर्यादा क्षेत्र घोषित किया जाए।2️⃣ गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधी ऐतिहासिक नियमों को सख्ती से लागू किया जाए।3️⃣ मांस, मदिरा एवं अन्य अपवित्र गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए, और सभी घाटों पर समान नियम लागू हों।

उन्होंने कहा कि यह किसी समुदाय के विरोध का विषय नहीं, बल्कि हिन्दू समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का प्रश्न है।


 
सरकार और प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा

जनभावनाओं का सम्मान या ऐतिहासिक भूल?

विश्व हिन्दू परिषद ने राज्य सरकार और प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि➡️ जनभावनाओं का सम्मान किया जाए➡️ ऐतिहासिक नियमों को लागू किया जाए➡️ कुंभ और गंगा की पवित्रता से कोई समझौता न हो


📝 निष्कर्ष: धर्म रहेगा तो परंपरा बचेगी

कुंभ की गरिमा और गंगा की मर्यादा पर कोई सौदा नहीं

आज प्रश्न यह नहीं है कि नियम बनाए जाएं या नहीं,  प्रश्न यह है कि👉 जो नियम पहले से हैं,👉 जो इतिहास, शास्त्र और परंपरा से जुड़े हैं,👉 क्या उन्हें लागू करने का साहस सरकार दिखाएगी?

गंगा की निर्मलता, कुंभ की गरिमा और सनातन संस्कृति की रक्षा अब केवल धार्मिक संगठनों की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज और शासन की जिम्मेदारी है।


✍️ स्वतंत्र पत्रकार  रामेश्वर गौड़