सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी भी भूस्वामी को अनिश्चित काल तक उसकी भूमि के उपयोग से वंचित नहीं किया जा सकता है। अदालत ने महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 127 का हवाला देते हुए कहा कि 33 वर्षों तक भूमि को विकास योजना में आरक्षित रखना उचित नहीं है।
रिपोर्ट - allnewsbharat.com
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी भी भूस्वामी को अनिश्चित काल तक उसकी भूमि के उपयोग से वंचित नहीं किया जा सकता है। अदालत ने महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 127 का हवाला देते हुए कहा कि 33 वर्षों तक भूमि को विकास योजना में आरक्षित रखना उचित नहीं है। मुख्य बातें: अदालत की टिप्पणी: न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के लिए कानून में 10 वर्षों की सीमा तय की गई है, जिसका राज्य और संबंधित प्राधिकरणों द्वारा अनिवार्य रूप से पालन किया जाना चाहिए। मामले का विवरण: यह मामला 2.47 हेक्टेयर भूमि के मालिकों द्वारा प्रस्तुत विकास योजना से जुड़ा था, जिसमें 1993 में निजी स्कूल के लिए भूखंड आरक्षित किया गया था। 2006 तक महाराष्ट्र प्राधिकरणों ने भूमि अधिग्रहण के लिए कोई कदम नहीं उठाया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनुचित बताते हुए भूमि मालिकों के अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि भूस्वामियों को उनकी भूमि के उपयोग से अनिश्चित काल तक वंचित नहीं किया जा सकता है। अदालत के इस फैसले का महत्व: यह फैसला भूमि मालिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और यह सुनिश्चित करता है कि सरकारें और प्राधिकरण भूमि अधिग्रहण के मामलों में कानूनी प्रावधानों का पालन करें।