विशाखापत्तनम में ज्योति कलश यात्रा का भव्य शुभारंभ, डॉ. चिन्मय पंड्या ने किया मार्गदर्शन


आगामी वर्ष शांतिकुंज की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा जी एवं दिव्य अखण्ड दीप का शताब्दी वर्ष है। इस निमित्त सनातन संस्कृति से ओतप्रोत माता भगवती देवी शर्मा के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से देश-विदेश में ज्योति कलश यात्रा निकाली जा रही है। इसी कड़ी में, गायत्री परिवार प्रमुखद्वय डॉ. प्रणव पंड्या एवं श्रद्धेया शैलदीदी के मार्गदर्शन में आंध्र प्रदेश के गायत्री चेतना केंद्र विशाखापत्तनम से ज्योति कलश यात्रा का भव्य शुभारंभ हुआ।

रिपोर्ट  - allnewsbharat.com

विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश): आगामी वर्ष शांतिकुंज की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा जी एवं दिव्य अखण्ड दीप का शताब्दी वर्ष है। इस निमित्त सनातन संस्कृति से ओतप्रोत माता भगवती देवी शर्मा के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से देश-विदेश में ज्योति कलश यात्रा निकाली जा रही है। इसी कड़ी में, गायत्री परिवार प्रमुखद्वय डॉ. प्रणव पंड्या एवं श्रद्धेया शैलदीदी के मार्गदर्शन में आंध्र प्रदेश के गायत्री चेतना केंद्र विशाखापत्तनम से ज्योति कलश यात्रा का भव्य शुभारंभ हुआ। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति ने दिखाई हरी झंडी इस महत्वपूर्ण यात्रा को भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ. चिन्मय पंड्या ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में गायत्री परिवार के सदस्य एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। डॉ. चिन्मय पंड्या का प्रेरणादायी उद्बोधन युवा आइकॉन डॉ. चिन्मय पंड्या ने इस अवसर पर कहा कि गायत्री परिवार समाज व राष्ट्र निर्माण के लिए आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को केंद्र में रखकर कार्य कर रहा है। उन्होंने युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचारों के अनुसार विभिन्न समसामयिक विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। पूर्व उपराष्ट्रपति ने शांतिकुंज को बताया जागृत तीर्थ पूर्व उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने गायत्री परिवार के मुख्यालय शांतिकुंज को एक जागृत तीर्थ बताते हुए परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचारों को आधार बनाकर अपनी बात रखी। उन्होंने शांतिकुंज और देव संस्कृति विश्वविद्यालय में अपने पूर्व के दौरों की स्मृतियों को भी साझा किया। डॉ. चिन्मय पंड्या ने श्री नायडू जी को गायत्री मंत्र चादर, युग साहित्य आदि भेंटकर सम्मानित किया। मां गायत्री की प्राण प्रतिष्ठा इससे पूर्व, युवा आइकॉन डॉ. चिन्मय पंड्या ने गायत्री चेतना केंद्र में नवनिर्मित मंदिर में आदिशक्ति मां गायत्री माता की वैदिक कर्मकांड के साथ प्राण प्रतिष्ठा की। इस दौरान आंध्र प्रदेश के कोने-कोने से हजारों परिजन एवं स्थानीय जन प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। यह ज्योति कलश यात्रा माता भगवती देवी शर्मा जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और समाज में आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निकाली जा रही है। यह यात्रा देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों में जाएगी और लोगों को गायत्री परिवार के संदेश से अवगत कराएगी।

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